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Budget 2021: फाइनेंस बिल में सरकार का ऐलान, सेटलमेंट कमीशन खत्म, रिटर्न की समयसीमा घटाई

नई दिल्ली।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान पेश फाइनेंस बिल में दो बड़े बदलावों की घोषणा की है, जिसके तहत सेटलमेंट कमीशन को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया गया है। जबकि रिव्यू रिटर्न और बिलेटेड रिटर्न फाइल करने की समय सीमा को भी तीन महीने कम कर दिया है। इसका सीधा असर आम आदमी से लेकर बड़े कारोबारियों पर पड़ेगा। सेटलमेंट कमीशन में ज्यादातर कारोबारियों की अपील होती है। जबकि रिटर्न हर व्यक्ति को प्रभावित करता है।

ऐसे समझिए
1— इनकम टैक्स अगर किसी कारोबारी पर 50 लाख रुपए से ज्यादा की टैक्स डिमांड निकालता था तो ऐसे मामले में अपील सेटलमेंट कमीशन में चली जाती थी। यहां के बाद उसे केस को आगे ले जाने का भी अधिकार होता था। लेकिन सरकार ने एक झटके में सेटलमेंट कमीशन को खत्म कर दिया। यह तत्काल प्रभाव से होगा और इसकी जगह पर इंटरिम बोर्ड ने जगह ले ली है जो अब इस तरह के मामलों की सुनवाई करेगा।

2— अभी तक सामान्य रिटर्न जमा करने की तारीख 31 जुलाई होती थी। उसके बाद अगर कोई गलती हुई है तो रिव्यू रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा वित्तीय वर्ष का आखिरी दिन यानि 31 मार्च होता था। इसके साथ ही अगर 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं हुआ है तो बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की तारीख भी 31 मार्च तक होती थी। जिसे अब तीन महीने कम कर दिया है। यानि 31 दिसंबर के बाद आप रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे।

सरकारी संपत्तियां बेचकर जुटाएंगे बजट का 5 फीसदी हिस्सा

इस वित्तीय वर्ष में सरकार अपनी माली हालत को व्यवस्थित रखने के लिए सरकारी संपत्तियों को बेचने के एजेंडे पर काम करेगी। यही वजह है कि इस बार कई कंपनियों के निजीकरण की भूमिका तय की गई है। अगर बजट की घोषणाओं को देखें तो सरकार ने वित्त वर्ष 2020—21 में निजीकरण से बजट का 0.9 फीसदी ही जुटाया है। लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में यह टारगेट 5 फीसदी रखा गया है। यह अमूमन बहुत ज्यादा है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में भी कई कंपनियों के निजीकरण की घोषणा की है। जिन कंपनियों को इस वित्तीय वर्ष में निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है, उनमें भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन, कंटेनर कॉरपोरेशन, पवन हंस, नीलांचल के अलावा आईडीबीआई समेत पब्लिक सेक्टर के दो बैंक और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन शामिल है। इनमें से कई कंपनियों के निजीकरण की तैयारी पिछले सालों से चल रही थी। माना जा रहा है कि इस वित्तीय वर्ष के आखिर तक इन कंपनियों का हस्तांतरण हो जाएगा।



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