निर्भया केस : मौत की आहट से ही पागल हो गए थे दोषी, जेल प्रशासन को दे रहे थे गालियां

नई दिल्ली। निर्भया (Nirbhaya Case) के गुनहगारों को आखिरकार उनके गुनाहों की सजा मिल ही गई। चारों दोषियों को एक साथ फांसी (Fansi) के फंदे पर लटकाया गया। इसी के साथ पूरे देश को भी इंसाफ मिल गया। हालांकि केस को उलझाने के लिए दोषी पक्ष के वकील ने काफी कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट के सामने उनकी एक न चली और उनके सभी दावों को खारिज कर दिया। चारों दोषियों को अपनी मौत का अंदाजा पहले से ही हो गया था तभी फैसले के एक दिन पहले से ही उनके बर्ताव में बदलाव आने लगे थे। विनय शर्मा और पवन गुप्ता के व्यवहार में तो इतनी ज्यादा असमान्यताएं (Mental Imbalance) देखने लगी कि वे जेल प्रशासन से गाली-गलौज तक करने लगे थे।

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चारों दोषियों (Nirbhaya Accused) के बर्ताव पर स्टडी कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक फांसी से एक दिन पहले से ही उनका दिमागी संतुलन काफी बिगड़ चुका था। वे काफी अजीबोगरीब हरकतें कर रहे थे। कई बार वो अपनी बैरक से झांकने लगते थे। तो कभी फालतू में ही जेल प्रशासन को गालियां देने लगते। डिप्रेशन (Depression) का शिकार सबसे ज्यादा विनय और पवन (Pawan Gupta) हुए। उनमें बेचैनी देखने को मिल रही थी। बताया जाता है कि विनय शर्मा (Vinay Sharma) ने जेल प्रशासन से बार-बार अपने दोस्त से मिलवाने की बात कही। जब विनय जेल नंबर 4 में रहता था तब वहां रहने वाले एक अन्य कैदी से उसका तालमेल अच्छा हो गया था। बाद में अलग होने की वजह से वो उसे मिस कर रहा था। मरने से कुछ दिन पहले दोनों ने एक-दूसरे को चिट्ठी भी लिखी थी।

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विनय के अलावा पवन गुप्ता के बर्ताव में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले। जेल प्रशासन के मुताबिक वो स्टाफ से बदतमीजी कर रहा था। खासतौर पर सेवादार को गालियां दे रहा था। इसके अलावा बार-बार दरवाजा खटखटाकर जेल के लोगों को बुला रहा था। वहीं इसके उलट मुकेश सिंह और अक्षय ठाकुर काफी शांत नजर आए। दोनों ने दूसरों से बोलना बंद कर दिया था। उनके चेहरे पर परेशानी देखी जा सकती थी। उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आ रही थी। मालूम हो कि चारों अपराधियों को जेल नंबर-3 के वार्ड-8 के ए-ब्लॉक में रखा था। सभी को अलग-अलग कमरों में रखा गया था। यहां से फांसी घर की दूरी महज 5 मिनट की थी।



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