मकर संक्रांति के दिन यहां साक्षात दर्शन देते हैं शिव के पुत्र, माना जाता है तिर्थस्थल

सबरीमाला मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। केरल राज्य में स्थापित सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा स्वामी की प्रतिमा स्थापित है। यहां लाखों की संख्य में लोग अयप्पा स्वामी के दर्शन के लिये आते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां लोग सिर्फ चमत्कार देखने आते हैं। दरअसर सबरीमाला मंदिर के दर्शन के लिये भक्तों को ऊंची पहाड़ियों के बीच से होकर जाना पड़ता है। वहीं मकर संक्रांति के दिन यहां अद्भुत चमत्कार होता है। कहा जाता है कि भगवान अयप्पा स्वामी साक्षात अपने भक्तों को दर्शन देने के लिये आते हैं।

 

Makaravilakku 2020

शिव जी के पुत्र हैं भगवान अयप्पा

सबरीमाला ना सिर्फ एक मंदिर बल्कि तीर्थ स्थल भी माना जाता है। यहां लोग तीर्थयात्रा के उद्देश्य से भी आते हैं। तिर्थयात्रा के उद्देश्य से आने वाले भक्तों को कठिन व्रत का पालन कर यहां पहुंचना होता है। यह व्रत इकतालीस दिनों तक किया जाता है। वैसे तो यहां सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां का नज़ारा अद्भुत व चमत्कारी होता है। मकर संक्रांति के दिन लोग भगवान शिव के पुत्र अयप्पा स्वामी के दर्शन के लिए आते हैं। शास्त्रों के अऩुसार कहा जाता है की शिव जी के कई पुत्र गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, भौम आदि थे और उन्हीं में से एक अयप्पा स्वामी भी थे।

 

सबरीमाला के महोत्सव

मकर विलक्कू, ये सबरीमाला का प्रमुख उत्सव हैं। मलयालम पंचांग के शुरुआती पांच दिनों और अप्रैल माह यानी विशु माह में ही इस मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। मंदिर में हर जाति के लोग दर्शन के लिए जा सकते हैं। मकर संक्रांति के दिन मंदिर के पास पहाड़ी की चोटी पर असाधारण चमक वाली ज्योति दिखाई देती है।

Makaravilakku 2020

सबरीमाला को लेकर ये है कथा

एक कथा के अनुसार बताया जाता है की यहां पंडालम के राजा राजशेखर ने अय्यप्पा को पुत्र के रूप में गोद लिया। लेकिन भगवान अय्यप्पा को ये सब अच्छा नहीं लगा और उन्होंने महल छोड़ दिया और वो चले गए। आज भी यह प्रथा है कि हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पंडालम राजमहल से अय्यप्पा के आभूषणों को संदूकों में रखकर एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। जो 90 किलोमीटर की यात्रा तय करके तीन दिन में सबरीमाला पहुंचती है। कहा जाता है इसी दिन यहां एक निराली घटना होती है।

पहाड़ी की कांतामाला चोटी पर असाधारण चमक वाली ज्योति दिखलाई देती है। बताया जाता है कि जब-जब ये रोशनी दिखती है इसके साथ शोर भी सुनाई देता है। भक्त मानते हैं कि ये देव ज्योति है और भगवान इसे जलाते हैं। मंदिर प्रबंधन के पुजारियों के मुताबिक मकर माह के पहले दिन आकाश में दिखने वाले एक खास तारा मकर ज्योति है।



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