दशानन को मारकर भगवान श्रीराम ने रावण से किसी पीढ़ी का लिया था 'बदला'?

दशहरे के दिन लंकापति रावण का प्रतिकात्मक दहन किया जाता है। मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि के नवमी तिथि के अगले दिन भगवान श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त की थी। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष्य मनाया जाता है।


इस मौके पर हम आपको एक ऐसा रहस्य को बताने जा रहे हैं, शायद आप उसे नहीं जानते होंगे। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान राम ने रावण को इसलिए मारा क्योंकि वह सीता का हरण कर के लंका ले गया था।


ये तो सौ फीसदी सच्च है। अगर दूसरे नजरीये से देखा जाए तो राम ने रावण से 36वीं पीढ़ी में 'बदला' लिया। अब आप सोच रहे होंगे कि भगवान राम ने रावण से कौन सा 'बदला' लिया था।


इसके लिए हम आपको थोड़ा सा पीछे लेकर चलते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ब्राह्मण जी के मानस पुत्रों में से एक मरीचि भी हैं। मरीचि के पुत्र कश्यप, कश्यप के पुत्र विवस्वन और विवस्वन के मनु। माना जाता है कि वैवस्तु मनु से ही सूर्यवंश की शुरुआत हुई।


सूर्यवंश में राजा इक्ष्वाकु परम प्रतामी राजा माने जाते हैं। इनसे इक्ष्वाकु वंश की शुरुआत हुई। इक्ष्वाकु वैवस्तु मनु के पुत्र बताए जाते हैं। इक्ष्वाकु वंश के राजा अनरण्य अयोध्या में राज करते थे।


पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण एक बार इक्ष्वाकु वंश के राजा अनरण्य के पास पहुंचा और युद्ध करने या फिर पराजय स्वीकार करने के लिए ललकारा। राजा अनरण्य पराजय स्वीकार न करके रावण से युद्ध किए। लेकिन वे रावण को हरा नहीं सके।


इस दौरान अनरण्य लहूलुहान हो गए। अनरण्य को लहुलुहान देखकर रावण इक्ष्वाकु वंश का उपहास करने लगा। उपहास देखकर अनरण्य कुपित होकर रावण को श्राप दे दिया कि यही वंश एक दिन तुम्हारा वध करेगा। ये कहकर राजा स्वर्ग सिधार गए। बता दें कि मनु वंश के राजा दशरथ 63वें शासक थे जबकि रामचंद्र जी 64वें जबकि अनरण्य मनु वंश के 28वें राजा थे। जबकि इक्ष्वाकु वंश के 22वें राजा थे।



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