सपने से दूर रखने के लिए घर वालों ने करवा दी शादी, फिर भी यूं पूरे किए अपने सपने

Motivational Story: पिंकसिटी जैसे शहर में थिएटर के जरिए जीवनयापन करना ना केवल मुश्किल है, बल्कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में पहचान बनाना भी आसान नहीं है। इसके बावजूद थिएटर में अपने अभिनय के जरिए शहर के रंगकर्मी महमूद अली को पहचान मिली, बल्कि नामचीन थिएटर डायरेक्टर्स से लगातार प्रोत्साहन भी मिला। महमूद के सोलो प्ले ‘मुगल बच्चा’ को लेकर शहर के दर्शकों ने नसीरुद्दीन शाह के प्ले से बेहतर बताया था। पत्रिका प्लस की मंडे मोटिवेशन सीरीज में हुए महमूद अली से हुई खास बातचीत, जानिए उनके बारे में...

बकौल महमूद, ‘पिता रेलवे में जॉब करते थे और वे चाहते थे कि मैं भी सरकारी नौकरी करके अपनी जिम्मेदारियां निभाऊं, लेकिन मैं रंगमंच से इतना अटैच हो चुका था कि कहीं भी जॉब करने को लेकर गंभीर नहीं था। थिएटर में शहर के नामचीन थिएटर डायरेक्टर्स और साथी रंगकर्मियों से प्रोत्साहन मिलने लगा था और इसके बाद सोच लिया था कि थिएटर से ही अपना जीवनयापन करना है।’

अल्टर का किया काम
‘मैं सुबह घर से निकलता था और रवीन्द्र मंच और जेकेके मेरा अगला ठिकाना होता था। दिनभर रिहर्सल, थिएटर वर्कशॉप और नाटक की प्रस्तुति में व्यस्त रहता था। इससे कोई खास इनकम तो हो नहीं रही थी, बल्कि खर्चे के लिए भी पैरेंट्स से पैसे मांगता था। मुझे थिएटर से दूर करने के लिए पैरेंट्स ने मेरी शादी की प्लानिंग की, मेरे मना करने के बाद इमोशनली कमजोर कर शादी करवा दी। उस वक्त मैं अपना ही खर्चा नहीं चला पा रहा था, परिवार की कैसे जिम्मेदारी उठाता। परिवार ने दो साल तक तो सभी तरह से साथ दिया, फिर मुझ पर ही परिवार की जिम्मेदारी डाल दी गई। ऐसे में मेरा स्ट्रगल शुरू हो गया, इसके चलते थिएटर को भी कम समय देने लगा। इस दौरान मैंने एक गारमेंट कंपनी में अल्टर का काम शुरू किया।

स्ट्रगलिंग फेज में साथ खड़ी रहीं वाइफ
जब जॉब से संतुष्ट नहीं हो पाया तो जॉब छोडक़र फिर से थिएटर में लग गया। इसमें वाइफ ने पूरी मदद की और वो मुझसे किसी भी तरह की डिमांड नहीं करती थी। यहीं से मैंने डिसाइड किया कि थिएटर से जीवन और परिवार को आगे बढ़ाना है। मैंने थिएटर की अलग-अलग टेक्निक सीखी, चिल्ड्रन इन एजुकेशन पर काम किया और फिर स्कूल-कॉलेजों में थिएटर पढ़ाने लगा। यहां से जीवन की गाड़ी फिर पटरी पर आ गई। आज भी मेरी कोई भी फिक्स मंथली इनकम नहीं है, सिर्फ थिएटर परफॉर्मेंस, वर्कशॉप, क्लास से ही आगे बढ़ रहा हूं।

साबिर सर कहते थे मुंबई चले जाओ
मैंने थिएटर की शुरुआत थिएटर डायरेक्टर साबिर खान की वर्कशॉप से की थी, वे मेरी एक्टिंग से काफी प्रभावित थे। वे मुझे अक्सर कहते हैं कि ‘तुम यहां क्या कर रहे हो, मुम्बई क्यों नहीं जाते? यहां से निकलो और आगे बढ़ो। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते कभी मुम्बई का सपना नहीं देखा। मुम्बई तो जब जाउंगा, जब मेरे परिवार को संभालने के लिए मेरे पास एक साल का बजट इक्ट्टा हो जाएगा। अभी तो मैं यहां अपने रंगकर्म में ही मस्त हूं और व्यस्त हूं। लगातार काम मिल रहा है, जयपुर में रहकर टीवी शो, शॉर्ट फिल्म और वेब सीरीज कर रहा हूं। अभी गोवा में ‘एनिमी ऑफ पीपुल’ और ‘डाकघर’ प्ले में एक्ट करके आया हूं।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal
Read The Rest:patrika...

No comments

Powered by Blogger.