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भारत-चीन के बीच 16 घंटे चली मैराथन वार्ता, सैनिकों की वापसी पर अब भी नहीं बन पाई बात!

नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा ( LAC ) पर पिछले कई महीनों चल रहे भारत और चीन के बीच तनाव को कम करने के लिए लगातार बातचीत का दौर जारी है। हाल में दोनों देशों ने एक बार फिर तनाव को कम करने के लिए सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता की।

सीमा विवाद सुलझाने के लिए मोल्‍दो बॉर्डर पर करीब 16 घंटे तक सैन्‍य वार्ता चली। हालांकि इस मैराथन बातचीत के दौरान पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले इलाकों हॉट स्प्रिंग्स, गोग्रा और डेपसांग से सैनिकों की जल्द वापसी को लेकर कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। सूत्रों की मानें तो इस मुद्दे पर फिलहाल और बातचीत की जरूरत है।

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पैंगोंग में सैनिकों की वापसी को बताया महत्वपूर्ण
दोनों देशों की तरफ से जारी किए गए संयुक्‍त बयान में कहा गया है कि पैंगोंग झील क्षेत्र से सैन्य वापसी पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन बातों पर बनी सहमति
दोनों पक्ष अपने नेताओं के बीच बनी सहमति, अपना संवाद और संपर्क जारी रखने, जमीन पर स्थिति को स्थिर और नियंत्रित करने और बाकी मुद्दों का संतुलित-व्यवस्थित तरीके से समाधान करने पर सहमत हुए हैं।

16 घंटे चली 10वें दौर की बातचीत
दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुई जो देर रात 2 बजे तक चली। इसके बाद ही दोनों देशों का संयुक्त बयान सामने आया। आपको बता दें कि ये दोनों देशों के बीच ये 10वें दौर की बातचीत थी।

ये बातचीत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ मोल्दो बिंदु क्षेत्र में शुरू हुई थी। बयान में कहा गया, 'दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र से अग्रिम पंक्ति के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया सुगमता से पूरी होने के बारे में एक-दूसरे को सकारात्मक रूप से अवगत कराया और उल्लेख किया कि यह पश्चिमी सेक्टर में एलएसी पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।'

ये रहा भारत का रुख
वार्ता में भारत ने तनाव कम करने के लिए हॉट स्प्रिंग्स, गोग्रा और डेपसांग क्षेत्रों से सैनिकों की जल्द वापसी पर जोर दिया। हालांकि इस मामले में फिलहाल कोई ठोस कामयाबी नहीं मिल पाई है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर अभी आगे भी बातचीत की जरूरत है।

भारत हमेशा जोर देकर कहता रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए तनातनी के सभी बिंदुओं से सैन्य वापसी आवश्यक है।

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5 मई को हुई थी खूनी झड़प
दोनों देशों की सेनाओं के बीच पैंगोंग झील क्षेत्र में पिछले साल पांच मई को हिंसक झड़प के बाद सैन्य गतिरोध उत्पन्न हो गया था। दोनों देशों ने तनाव के बीच हजारों सैनिकों और भारी अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी। दोनों पक्षों के बीच लगातार कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता भी होती रही।



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