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म्यामांर की सेना को 11 देशों की सलाह- प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक न हों

नई दिल्ली।

म्यांमार में काउंसलर आंग सान सूकी समेत सत्तारूढ़ दल के तमाम प्रमुख नेताओं की रिहाई और देश में लोकतंत्र स्थापित करने के लिए विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया। गत सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में लाखों लोग सडक़ पर उतर गए। देश में तख्तापलट और सैन्य शासन के बाद यह पहली बार था, जब लोग सेना के खिलाफ सडक़ों पर उतरे।

म्यांमार की अपदस्थ स्टेट काउंसलर आंग सान सू की समेत लोकतांत्रिक नेताओं की रिहाई और सैन्य शासन खत्म करने की मांग को लेकर लाखों लोग सडक़ों पर डटे हुए हैं। सैन्य शासन के बाद पहली बार यंगून सहित कई शहरों की सडक़ों पर टैंक और हथियारबंद गाडिय़ां घूमते देखी गईं। यहां बौद्ध भिक्षुओं और इंजीनियरों ने रैली निकाली।

राजधानी नेपीडॉ की गलियों में मोटसाइकिल रैली निकली। कई शहरों में शाम ८ से सुबह ४ बजे तक क र्यू है। प्रदर्शनकारियों को अंदेशा है कि सैन्य शासन बिजली काट कर अंधेरे में लोगों को गिर तार कर सकता है। सुरक्षाबलों के छापे से साथियों को आगाह करने के लिए लोग बर्तन बजा रहे हैं। काचिन प्रांत के मितकिना में ५ पत्रकारों को गिर तार किया गया है। रबर बुलेट भी चलीं। सैन्य शासन ने कई नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया है। बिना वारंट तलाशी व गिर तारी के अधिकार दे दिए हैं। यंगून में अमरीकी दूतावास ने अपने नागरिकों से क र्यू के दौरान घरों से बाहर न निकलने को कहा है। यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन व कनाडा समेत 11 पश्चिमी देशों के दूतावासों ने सैन्य शासन से हिंसात्मक रवैया न अपनाने की अपील की है।

रविवार और सोमवार को रात 1 से ९ बजे के बीच इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं। इस बीच ‘ब्रदरहुड ऑफ यांमार हैकर्स’ ने यांमार डिजिटल न्यूज वेबसाइट हैक कर इस पर सैन्य शासन के खिलाफ सामग्री व तस्वीरें लगा दीं।

मांडले और राजधानी नेपीडॉ के साथ-साथ दूरदराज के अल्पसं यक बहुल इलाकों में प्रदर्शन जारी हैं। चीनी दूतावास के बाहर भी लोगों ने प्रदर्शन किए। आरोप है कि चीन, यांमार के सैन्य शासन की इंटरनेट बंद करने जैसे कामों में मदद कर रहा है।



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