एक मासूम लड़की से दस्यु सुंदरी बनने की कहानी है फूलन, जानिए उससे जुड़े सभी सवालों के जवाब
आज फूलन देवी (Phoolan devi) की मृत्यु को लगभग 20 वर्ष बीत चुके हैं परन्तु जीवन में अनगिनत उतार-चढ़ाव देखने वाली फूलन देवी के एक मासूम लड़की से दस्यु सुंदरी बनने के किस्से आज भी चंबल के बीहड़ों में सुने और सुनाए जाते हैं। फूलन की कहानी में कई किस्से हैं, जिनके आधार पर कोई उससे सहानुभूति रखता है तो कोई उसे खूंखार डकैत मान कर सख्त नफरत करता है।
अच्छा लीडर वही जो सबको भी सुने और खुद को इको चैम्बर न बनने दे - प्रोफेसर हिमांशु राय
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ये है फूलन देवी की कहानी (Phoolan devi life story)
10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव गोरहा में जन्मी फूलन का परिवार बहुत गरीब था। उसके पिता मेहनत मजदूरी कर जैसे-तैसे घर चला रहे थे।
महज 11 वर्ष की उम्र में हो गई थी शादी (Phoolan devi marriage)
10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव गोरहा में जन्मी फूलन की शादी महज 11 वर्ष की उम्र में एक बूढ़े आदमी पुट्टी लाल से हो गई। वो शादी के लिए तैयार नहीं थी और शादी के बाद ही उसे यौन शोषण का शिकार बनना पड़ा। इसके बाद वो वापस अपने घर भागकर आ गई और अपने पिता के साथ मजदूरी में हाथ बंटाने लगी।
बनना पड़ा गैंगरेप का शिकार (Phoolan devi life history)
जब फूलन 15 वर्ष की थी तब उसे अपने ही गांव के ठाकुरों के गैंगरेप का शिकार बनना पड़ा। पूरे गांव के सामने उसे निर्वस्त्र कर प्रताड़ित किया गया। इस घटना को लेकर फूलन दर-दर भटकती रही लेकिन न्याय नहीं मिला। इस पर उसने बदला लेने का निश्चय किया।
कुछ ही समय बाद उसके गांव में डकैतों ने हमला किया। डकैत जाते वक्त फूलन को भी अपने साथ उठा ले गए। वहां उसके साथ लगातार रेप होने लगा। यहीं उसकी मुलाकात विक्रम मल्लाह से हुई। दोनों ने मिलकर डाकुओं का एक अलग गैंग बनाया।
खुद का गैंग बनाने के बाद फूलन ने अपने गैंगरेप का बदला लेने के लिए गांव पर छापा मारा और 1981 में गांव के ही 22 सवर्ण जाति के लोगों को एक लाइन में खड़ा कर गोलियों से छलनी कर दिया। इस घटना के बाद वो देश की नामी डकैत बन गई। सरकार ने उसके सिर पर इनाम रख दिया, उत्तरप्रदेश तथा मध्यप्रदेश की पुलिस उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे लग गई।
इंदिरा गांधी की अपील पर किया सरेंडर (Phoolan devi surrender)
वर्ष 1983 में फूलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अपील पर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उस वक्त तक उसका साथी विक्रम मल्लाह भी मारा जा चुका था और दूसरी गैंग्स के मुकाबले उसका गिरोह कमजोर हो गया था। हालांकि उसने सरेंडर करते समय कुछ शर्तें रखी जिन्हें सरकार ने मान लिया। इनमें पहली शर्त यही थी कि उसे या उसके साथियों को मृत्युदंड नहीं मिलेगा, साथ ही उसे या उसके किसी भी साथी को 8 वर्ष से अधिक की कैद नहीं दी जाएगी। हालांकि फूलन को 11 वर्ष तक बिना मुकदमे के ही जेल में रहना पड़ा।
सपा के टिकट पर चुनाव जीत बनी सांसद (phoolan devi election)
वर्ष 1984 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने उसे जेल से रिहा किया। रिहा होने के बाद उसे समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला। उसने चुनाव लड़ा और जीता भी। वो मिर्जापुर सीट से जीतकर सांसद बनी और सदन पहुंची।
फूलन के पति पर लगा हत्या का आरोप (Phoolan devi husband)
जेल से रिहा होने के बाद फूलन ने उम्मेद सिंह से विवाह कर लिया। उम्मेद सिंह ने वर्ष 2004 और 2009 में कांग्रेस तथा वर्ष 2014 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। बाद में फूलन की बहन मुन्नी देवी ने उम्मेद पर फूलन की हत्या में शामिल होने का भी आरोप लगाया था।
2001 में गोली मार कर कर दी गई हत्या (Phoolan devi death)
वर्ष 2001 में दिल्ली में फूलन देवी के घर पर ही उसकी हत्या कर दी गई। हत्या करने वाले शेर सिंह राणा ने कहा कि यह फूलन द्वारा 1981 में की गई सवर्णों की हत्या का बदला थी।
फूलन की कहानी पर फिल्म भी बनी (Phoolan devi movie)
फूलन की जीवनी पर वर्ष 1994 में शेखर कपूर ने बैंडिट क्वीन नाम से एक फिल्म भी बनाई। फिल्म की कहानी माला सेन द्वारा लिखी गई एक पुस्तक India's Bandit Queen पर आधारित थी। हालांकि फिल्म में फूलन को मेन कैरेक्टर के रूप में रखा गया था परन्तु उसने इस पर आपत्ति जताई बाद में प्रोड्यूसर और उसके बीच समझौता हो गया और फिल्म रिलीज की गई। फिल्म ने कई अवॉर्ड भी जीते।
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