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गुप्त नवरात्रि में इन दस देवियों की होती है विशेष साधना व पूजा

साल में कुल चार बार आते हैं नवरात्रि पर्व। दो नवरात्र सामान्य होती है और दो गुप्त होती है। तांत्रिक पूजा और मनोकामना पूरी करने में चैत्र और आश्विन मास में आने वाली नवरात्र से ज्यादा महत्व गुप्त नवरात्र का माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में दस दिनों तक गुप्त रूप से देवी की विशे। साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रियां माघ मास और आषाढ़ मास में आती है। गुप्त नवरात्र में विशेष रूप से तंत्र साधनाएं की जाती है।

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इन 10 देवियों की होती है विशेष साधना

गुप्त नवरात्र में की गई तांत्रिक साधनाएं सफल और सिद्धिदायक होती है और सामान्य से पूजन का भी 9 गुना अधिक फल प्राप्त होता है। गुप्त नवरात्र में की जाने वाली साधना को गुप्त रखा जाता है। इस साधना से देवी जल्दी प्रसन्न होती है। गुप्त नवरात्रि में दस (10) महाविद्याओं का पूजन किया जाता है। ये हैं दस महाविद्या काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।

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गुप्त नवरात्र की पौराणिक कथा

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि श्रंगी ऋषि एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली हे गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती। मैं माँ भी दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से माँ की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें।

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श्रंगी ऋषि बोले हे पुत्री वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो माँ दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में श्रंगी ऋषि के बताये अनुसार माँ दुर्गा की कठोर साधना की। स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से माता प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ और उसका घर खुशियों से संपन्न होने लगा।

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गुप्त नवरात्र में पूजा विधि

गुप्त नवरात्र के पहले दिन, नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेकर घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम माँ दुर्गा की पूजा और माता के मंत्रों का जप करें। तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं।

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1- गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा देर रात में करें।

2- मूर्ति स्थापना के बाद मां दुर्गा को लाल सिंदूर, लाल चुन्नी चढ़ाएं।

3- नारियल, केले, सेब, तिल के लडडू, बताशे चढ़ाएं और लाल गुलाब के फूल भी अर्पित करें।

4- गुप्त नवरात्रि में सरसों के तेल के ही दीपक जलाएं।

5- इस बीज मंत्र सुबह-शाम 27 माला का जप करें।

मंत्र- "ॐ दुं दुर्गायै नमः"

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गुप्त नवरात्रि में इन दस देवियों की होती है विशेष साधना व पूजा

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