SC के रुख से केजरीवाल सरकार के ऑड-ईवन योजना को लग सकता है झटका, पूछा- 3 हजार बसों का क्‍या हुआ?

नई दिल्‍ली। दिल्ली सरकार की ऑड-ईवन योजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख से साफ है कि इस मुद्दे पर दिल्‍ली की केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका लग सकता है। ऑड-ईवन योजना लागू होने के कुछ घंटों के अंदर ही सुप्रीम कोर्ट केजरीवाल सरकार से तीखे सवाल किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली सरकार से पूछा है कि उन्‍होंने उन कारों को सड़कों पर दौड़ने से क्यों रोक दिया जो दुपहिया तथा तिपहिया वाहनों तथा टैक्सियों के मुकाबले कम प्रदूषण फैला रही हैं।

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दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण के मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि वह ऑड-ईवन योजना से क्या हासिल करना चाह रही है। उन 3,000 बसों का क्‍या हुआ जिन्‍हें सार्वजनिक परिवहन में लाया जाना था।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि दुपहिया, तिपहिया और टैक्सियां सम-विषय योजना के दौरान सड़कों पर ज्यादा चलेंगी।

खासतौर से पेट्रोल से चलने वाली कारों से होने वाले प्रदूषण का उत्सर्जन टैक्सियों और ऑटो रिक्शा के मुकाबले कम है।

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पहले के आंकड़े पेश करे दिल्‍ली सरकार

दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में तिपहिया वाहन और टैक्सियां सीएनजी पर चलती हैं जो पेट्रोल तथा डीजल के मुकाबले ज्यादा स्वच्छ ईंधन हैं। पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि पूर्व में जब इस योजना को लागू किया गया था तो उस समय प्रदूषण के स्तर पर आंकड़ों को वह 8 नवंबर को उसके समक्ष पेश करें।

दिल्ली सरकार को ऐसे आंकड़ों को भी पेश करने के निर्देश दिए जिसमें पूर्व में लागू की गई सम-विषय योजना के दौरान चारपहिया वाहनों को सड़कों पर चलने से रोककर प्रदूषण के स्तर में आए फर्क का पता चल सके। न्यायालय ने दिल्ली सरकार के वकील से पूछा कि ऑटो और टैक्सी सम-विषम योजना के दौरान अधिक चलेंगे। वे प्रदूषण फैलाएंगे। आप कारों को क्यों रोक रहे हैं जो कम प्रदूषण करती हैं?

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पीठ ने दिल्ली सरकार से यह भी पूछा कि क्या वाकई उसे लगता है कि लोग सम-विषम योजना के दौरान अन्य लोगों के साथ साझा तौर पर सफर करना शुरू करेंगे। पीठ ने कहा कि डीजल वाहनों पर रोक लगाना ठीक है लेकिन इस सम-विषम का क्या औचित्य है?

असल मुद्दा यह है कि आप एक वाहन को रोक रहे हैं लेकिन अन्य वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं. आपको सार्वजनिक परिवहन बढ़ाना होगा. आपके पास मेट्रो के लिए निधि नहीं है. आप इसके लिए योगदान नहीं दे रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि तीन साल पहले जब मैं उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बना था तो कहा गया कि सार्वजनिक परिवहन में 3 हजार बसें लाई जाएंगी। अभी तक केवल 300 बसें लाई गई।

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