8 घंटे से ज्यादा काम करने पर नहीं मिलेगा ओवटाइम, सरकार ने ड्राफ्ट में किए कई अहम बदलाव
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों ने एक बुरी खबर सामने आ रही है। अब 8 घंटों से ज्यादा काम करने वाले कर्मचारियों को ओवरटाइम ना देने का बात सामने आ रही है। सरकार उन ही लोगों को ओवरटाइम देने पर विचार कर रही है जो अवकाश के दिन काम करेंगे। आपको बता दें कि मौजूदा समय में काम करने का स्टैंडर्ड टाइम 8 घंटे का है। जिसके आधारपर पूरे महीने की सैलरी तय होती है। जिसे 9 या उससे ज्यादा घंटे तय करने पर काम किया जा रहा है।
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लेबर मिनिस्ट्री तैयार किया प्रिलिमिनरी ड्राफ्ट
लेबर मिनिस्ट्री एक बार फिर से काम करने के घंटों को रिवाइज करने का प्लान बना रहा है। मिनिस्ट्री की ओर से एक प्रिलिमिनरी ड्राफ्ट भी तैयार किया गया है। जिसमें काम करने के घंटों में बदलाव करने के साथ कुछ नई बातें कही गईं हैं। इस ड्राफ्ट में इस बात का बिल्कुल भी जिक्र नहीं है कि काम के घंटे बढऩे के साथ उनकी सैलरी में इजाफा किया जाएगा या नहीं। बल्कि अवकाश के दिन काम करने वाले कर्मचारियों को ओवरटाइम देने की बात कही गई है।
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इतने घंटे हो सकते हैं वर्किंग आवर्स
लेबर मिनिस्ट्री के अनुसार ऑफिसों में वर्किंग आवर्स 9 घंटे हो सकता है। मिनिस्ट्री का तर्क है कि इससे इंप्लोयर अपने कर्मचारियों से ज्यादा से ज्यादा काम ले सकेंगे। वहीं इंप्लॉयर जरुरत पडऩे पर काम करने के समय को 12 घंटे भी कर सकते हैं। इसका मतलब ये है कि इंप्लॉयर कर्मचारी से घंटे की सैलरी के हिसाब से काम करने को कह सकते हैं। वहीं खास श्रेणी के कर्मचारियों से इमरजेंसी में 16 घंटे भी काम ले सकते हैं। ताज्जुब की बात तो ये है कि 9 से ज्यादा घंटे तक काम करने वालों को ओवरटाइम दिया जाएगा या नहीं इस बारे में कोई जिक्र नहीं है। न्यूनतम मजदूरी (सेंट्रल रूल्स) ऐक्ट 1950 के अनुसार 9 घंटे से ज्यादा काम लेने पर हर साधारण मजदूरी से 150-200 फीसदी की दर से ज्यादा सैलरी देने का प्रावधान किया गया है। ड्राफ्ट में उन कर्मचारियों को ओवरटाइम देने का जिक्र है जो अवकाश दिन काम करेंगे। आपको बता दें कि अलग-अलग राज्यों में न्यूनतम वेतन भी अलग-अलग है। नगालैंड में 115 रुपए तो केरल में 1,192 रुपए न्यूनतम वेतन दिया जाता है।
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इस तरह से तैयार किया गया है न्यूनतम वेतन
सरकार की ओर से तैयार किए ड्राफ्ट के अनुसार मिनिमम सैलरी भौगोलिक आधार पर तय करने की जरुरत है। इसके लिए तीन श्रेणी तैयार की गई हैं। जिसमें महानगर, नॉन-मेट्रो सिटीज और ग्रामीण इलाके शामिल किए गए हैं। खास बात से है कि सैलरी की गणना के तरीके में कोई फर्क नहीं रखा जाएगा। इस तरीके से रोजाना कैलरी इनटेक 2700, 4 सदस्यों वाले परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़ा, खाने और कपड़ों पर खर्च का 10 फीसदी हिस्सा, मकान का किराया, यूटिलिटी पर न्यूनतम वेतन का 20 फीसदी खर्च और शिक्षा पर 25 फीसदी खर्च का शामिल किया गया है।
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