आलाचाकों पर भड़कीं निर्मला सीतारमण, कहा - आरबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना 'विचित्र'
नई दिल्ली। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को बिमल जालान समिति की सिफारिशों की आलोचना करनेवालों को आड़े हाथों लिया। आरबीआई के इकॉनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (इसीएफ) के आधार पर आरबीआई ने केंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ दिए हैं।
आयकर अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि जालान समिति की रिपोर्ट को देखते हुए आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना 'विचित्र' है।
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आरबीआई ने खुद गठित किया था समिति
उन्होंने कहा, "बिमल जालान समिति में प्रख्यात विशेषज्ञ थे। इसका गठन आरबीआई ने खुद किया था, न कि सरकार ने। उन्होंने कई दौर की बैठकें की, अतिरिक्त पूंजी ढांचे को देखने के लिए एक सूत्र तैयार किया। अब आरबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना मेरे समझ से विचित्र है, क्योंकि इस समिति का गठन खुद आरबीआई ने किया था।"
आरबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना आरबीआई पर प्रश्नचिन्ह लगाना है
उन्होंने कहा, "आरबीआई ने खुद कहा है कि समिति ने वित्तीय स्थिरता, आपातकालीन मुद्दों से निपटने के लिए अधिशेष रखने और सरकार को देने को लेकर एक फार्मूला तैयार किया। इसलिए आरबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना आरबीआई पर प्रश्नचिन्ह लगाना है, क्योंकि उसी ने समिति का चयन किया और समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ काम किया।"
सोमवार को आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ने बिमल जालान समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और सरकार को चालू वित्त वर्ष में 1.76 लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया।
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करदाताओं के उत्पीडऩ की आशंका
उन्होंने मंगलवार को एक बार फिर कहा कि कर संग्रह का लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा, इसलिए आयकर अधिकारियों को अधिक उत्साही और महत्वाकांक्षी होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कर संग्रह के डेडलाइन को अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया गया है, इसलिए इसे प्राप्त करना असंभव नहीं है।
मंत्री ने कहा, "इसलिए मेरी गुजारिश है कि कर वसूलने की प्रक्रिया में महत्वाकांक्षी न बनें। अगर इसमें थोड़ी कमी आती है तो भी इसे बड़ी आसानी से पूरा कर लिया जाएगा।"
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