संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा के बाद जरूर करें इस मंत्र का जप, संतान सुख में होगी वृद्धि
संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ, तिलकुट चतुर्थी, संकटा चौथ, तिलकुट चौथ से भी जाना जाता है। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की चतुर्थी के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को शहद, रोली, चंदन और रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें। इस दिन महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं। इस व्रत को महिलाएं अपने पुत्र की सफलता व उनकी लंबी आयु के लिए रखती है। माना जाता है की संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सारे संकट समाप्त हो जाते हैं। संकष्टी व्रत में भगवान गणेश की पूजा के बाद कथा भी सुनाई जाती है। इस बार संकष्टी चतुर्थी 19 अगस्त यानी सोमवार को मनाई जाएगी।
संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त:
संकष्टी चतुर्थी में इस बार पूजा का अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11:58 बजे से 12:50 तक है।
ऐसे करें पूजन:
कुम्हार के चॉक की मिट्टी से अंगूठे के बराबर मूर्ति बनाकर उपरोक्त तरीके से पूजन करें तथा 101 माला ‘ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं’ की जप कर हवन करें। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर अपना मुख रखें। भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र सामने रखकर किसी स्वच्छ आसन पर बैठ जाएं। अब फल फूल, अक्षत, रोली और पंचामृत से भगवान गणेश को स्नान कराएं। इसके बाद शाम के समय भगवान गणेश को जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें. अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहें, उसके बाद श्री गणेश जी को प्रणाम करें।
एक थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है। त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें। संतान की लंबी आयु की कामना करें। पूजन उपरांत चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें। पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी के दिन गणपति की पूजा से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। शांति बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी घर में आ रही सारी विपदाओं को दूर करते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। चंद्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है।
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