कश्मीर में बकरीद का जश्न, तस्वीर देख आप भी करेंगे वाह-वाह
अनुच्छेद 370 ( Article 370 ) और 35A हटाये जाने के बाद नए जम्मू-कश्मीर ( Jammu and Kashmir ) की पहली बकरीद ( bakra eid ) है। इस मौके पर कश्मीर में लोगों ने मस्जिदों में नमाज अदा की और एक दूसरे को मुबारकबाद दी। दरअसल, इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने के लगभग 70 दिनों के बाद बकरीद ( eid al-adha ) आती है। बकरीद का त्यौहार ( bakrid Festival ) मुख्य रूप से कुर्बानी के पर्व festival of sacrifice ) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। गौरतलब है कि इस्लाम में मीठी ईद के बाद बकरीद ( bakrid ) प्रमुख त्यौहार है।
SRINAGAR: People offered namaz in the morning at Mohalla mosques in various parts of the city on #EidAlAdha, today. #JammuAndKasmir pic.twitter.com/5TcwnW0bQf
— ANI (@ANI) August 12, 2019
क्यों मनाई जाती है बकरीद
इस्लाम मानने वाले लोगों के लिए बकरीद का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल को कुदा के हुक्म पर कुर्बान करने जा रहे थे। माना जाता है कि अल्लाह ने उनके नेक जज्बे को देखते हुए उनके बेटे को जीवनदान दे दिया। इसी की याद में बकरीद मनाई जाती है।
SRINAGAR: People offered Eid namaz in the morning at Mohalla mosques on #EidAlAdha, today. Large groups of people are not allowed to assemble, traffic restrictions in place. #JammuAndKasmir pic.twitter.com/CA2QDcHxND
— ANI (@ANI) August 12, 2019
बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी
मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम जब अपने बेटे को कुर्बानी देने जा रहे थे, तब उन्हे लगा कि उनकी भावनाएं आड़े आ सकती है, इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। हजरत इब्राहिम जब अपना काम पूरा लिया तो उन्होंने पट्टी हटाई। पट्टी हटाने पर उन्होंने देखा कि उनका पुत्र जिन्दा खड़ा है और बेदी पर कटा हुआ दुम्बा ( सऊदी में पाये जाने वाला भेड़ जैसा जानवर) पड़ा हुआ है। तब ही से इस मौके पर कुर्बानी देने की प्रथा शुरू हो गई।
JAMMU: Devotees offer namaaz in the city on the occasion of #EidAlAdha. #JammuAndKashmir pic.twitter.com/DGIMJ1GYIH
— ANI (@ANI) August 12, 2019
बकरीद का महत्व
बकरीद का दिन फर्ज-ए-कुर्बान का दिन होता है। इस दिन गरीबों का विशेष ध्यान दिया जाता है। कुर्बानी के बाद गोश्त को तीन हिस्सों में बांट दिया जाता है। इसमें से एक हिस्सा खुद के लिए होता है और अन्य दो हिस्से को गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांट दिया जाता है।
#WATCH SRINAGAR: People offered namaz in the morning at Mohalla mosques on #EidAlAdha, today; J&K police officials greet people outside a neighbourhood mosque #JammuAndKashmir pic.twitter.com/5gcZeYqCWz
— ANI (@ANI) August 12, 2019
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