ट्रंप के बयान से 70 डॉलर पर आ गई कच्चे तेल की कीमतें, आपकी जेब पर ऐसे होगा असर

नई दिल्ली। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने ट्वीट करते हुए कहा कि 10 मई को 200 अरब डॉलर (13.84 लाख करोड़ रुपए) के चाइनीज इंपोर्ट पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर देंगे और यह बदलाव शुक्रवार से लागू हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर चीन से आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। ट्रंप द्वारा रविवार को इस बाबत चेतावनी देने के बाद सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई और ब्रेंट क्रूड का भाव फिर 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा-


पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से सराकार की चिंता भी कम हो जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। ईंधन के बढ़ते दाम से परेशान आम आदमी को भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है। कच्चे तेल का सबसे ज्यादा असर भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ता है। जब भी देश में कच्चे तेल के दाम कम होते हैं तो उससे भारत में पेट्रोल औ? डीजल ?? के दामों में भी गिरावट देखी जाती है, जिससे जनता को कम रुपए में पेट्रोल-डीजल मिल जाता है।


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महंगाई होगी कम

देश में बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए सरकार के पास यह अच्छा समय है। कच्चे तेल की कम कीमत का मतलब महंगाई पर कम दबाव और केंद्रीय बैंक पर मुख्य ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कम दबाव होना है। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे देश के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।


निवेशकों पर कच्चे तेल की कीमतों का असर

क्रूड की कीमतों में नरमी आने से आयात बिल में भी कमी आएगी। यह इसका सबसे बड़ा फायदा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक खबर है। कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से आयात बिल में भी बचत होगी, जिसका सीधा असर सरकार पर पड़ेगा।


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ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा फायदा

आपको बता दें कि कच्चे तेल के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें गिरेंगी और जब पेट्रोल और डीजल ससस्ता होगा तो उससे ऑटोमोबाइल की मांग बढ़ जाती है तो इस तरह से ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी इसका फायदा होगा।


शेयर बाजार पर पड़ता है ये असर

अर्थव्यवस्था के लिए बेशक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट होना एक अच्छी खबर है, लेकिन शेयर बाजार के लिए यह अर्थव्यवस्था जितनी अच्छी नहीं है। यानी इसका शेयर बाजार पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता है। आपको बता दें कि क्रूड के ऊंचे स्तरों पर शेयर बाजार बढ़ता है। वहीं, निचले स्तरों पर इसमें गिरावट आती है।


जानिए कच्चे तेल का भाव

आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार आईसीई पर सोमवार को कच्चे तेल का जुलाई वायदा पिछले सत्र से 2.10 फीसदी की कमजोरी के साथ 69.36 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था। वहीं, डब्ल्यूटीआई का जून अनुबंध 2.29 फीसदी की गिरावट के साथ 60.52 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था।

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