मुफ्त समझकर सरकारी बंगले, बिजली-पानी का किया था इस्तेमाल, अब चुकाने पड़ेंगे 2.8 करोड़ रूपए

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुफ्त बंगले और अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के 2001 से लेकर अब तक फैसलों को गैर-कानूनी और गैर संवैधानिक करार दिया है। उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आदेश दिया है कि वे 2.8 करोड़ रूपए का बकाया किराया छह महीने के अंदर चुकाएं।

बाजार दर से चुकानी होगी किराए की रकम

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुलबे की खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आदेश दिया कि ऐसे बंगलों के किराए की बकाया रकम का भुगतान बाजार दर से करें। पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुफ्त बंगला व सुविधाएं देने के खिलाफ याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश कौशल ने लगाई थी।

छह महीने के अंदर भुगतान करने का आदेश

पूर्व मुख्यमंत्रियों को बिजली, पानी और पेट्रोल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी उच्च न्यायालय सख्त नजर आया। न्यायालय ने आदेश दिया कि उत्तराखंड सरकार इन सुविधाओं के भुगतान की रकम की गणना चार महीनों में कर ले। पूर्व मुख्यमंत्रियों को इसका भुगतान भी छह महीनों के अंदर ही करना होगा। न्यायालय ने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करते, तो राज्य सरकार उनके खिलाफ वसूली की कार्यवाही कर सकती है।



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