महाराष्‍ट्र राजनीतिक संकट: सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से मांगा हलफनामा, कल सुबह 10.30 बजे होगी सुनवाई

नई दिल्‍ली। महाराष्ट्र में एक महीने से जारी हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामे के बीच अब सबकी नजरें लगी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई जारी है। तीनों पार्टियों ने याचिका में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और डेप्युटी सीएम अजित पवार के शपथग्रहण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस अहम मामले में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर हलफनामा दायर करने को कहा गया है।


एनसीपी की तरफ से पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने भी जल्द से जल्द बहुमत परीक्षण की मांग की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अजित पवार को एनसीपी विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया है। अजित के पास उनकी ही पार्टी का समर्थन नहीं है। उन्हें डेप्युटी सीएम क्यों बना दिया गया? सिंघवी ने कहा कि एनसीपी (शरद पवार कैंप) के पास 41 विधायक एकजुट हैं।
शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलील में राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि राज्यपाल कैसे आश्वस्त हुए कि फडणवीस के पास बहुमत है, राज्यपाल को कौन सी चिट्ठी मिली। सीएम की शपथ का आखिर आधार क्या है? राज्यपाल ने समर्थन की चिट्ठी की जांच क्यों नहीं की?

शिवसेना की तरफ से दलील दे रहे कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कर्नाटक की तर्ज पर 24 घंटे के भीतर बहुमत परीक्षण कराने का आदेश देने की मांग की। उन्होंने कर्नाटक का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 19 दिनों का वक्त दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था।
शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि महाराष्ट्र में जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट हो। सिब्बल ने कहा कि गवर्नर कैसे आश्वस्त हुए कि फडणवीस के पास बहुमत है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर गवर्नर को लगता है कि किसी के पास बहुमत है तो वह उसे बुला सकते हैं।
कपिल सिब्बल ने अपनी दलील में राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आनन-फानन में राष्ट्रपति शासन हटाकर अचानक शपथ दिलवाई गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन को हटाने की कैबिनेट से मंजूरी तक नहीं ली गई। सिब्बल ने कहा कि अगर बीजेपी के पास बहुमत है तो वह जल्द से जल्द साबित करे।

इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने पर उठाया सवाल। उन्होंने कहा कि महा विकास अघाड़ी हाई कोर्ट जा सकता था। वे सीधे सुप्रीम कोर्ट कैसे आए। इस बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आप किसका पक्ष रखेंगे। इस पर मेहता बोले रात को याचिका दी गई इसलिए मैं कोर्ट में आया हूं।
बीजेपी की तरफ से दलील रख रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने रविवार को अवकाश के दिन सुनवाई पर आपत्ति उठाई है। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या इमर्जेंसी थी कि छुट्टी के दिन सुनवाई हो रही है।
सीनियर ऐडवोके मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी की तरफ से पक्ष रख रहे हैं। दूसरी तरफ महा विकास अघाड़ी की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी मुख्य तौर पर पक्ष रख रहे हैं। जस्टिस एन. वी. रमन्ना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही है।
बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी ने फडणवीस सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 30 नवंबर तक का वक्त दिया है। शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के महा विकास अघाड़ी ने अपनी याचिका में राज्य में 24 घंटे के भीतर बहुमत परीक्षण का आदेश देने की मांग की है।

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